Ramkishan Dixit

From Some Degree of transparency
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Rankishan का जनम एक हिन्दू परिवार में 1969 को हुआ था उनके पिता का नाम चुनी लाल था माता का नाम मणि देवी था उनकी शिक्षा मध्य प्रदेश के अनेक शहर में हुई क्योकि उनके पिता जी मध्य प्रदेश पुलिस मे थे जिस कारण से उनको हर दो साल में अपना स्कूल छोड़ना पड़ता था ये बात उनको पशंद नहीं थी मगर वो इस बात की सिकायत नहीं कर सकते थे उन्होंने अपना स्नातक महर्षि दयानन्द यूनिवर्सिटी रोहतक से किया.उनके पिता का सपना था की वे सेना मे भर्ती हो जाये पिता के डर से 1988 सेना मे भर्ती हो गए मगर उनके दिमाक मे कुछ और ही चल रहा था उनकी रूचि तो किसी और मे थी वो अपना खुद का बिज़नेस करना चाते थे जब ये बात अपनी माता को बताए तो उन्होंने कहा की ये बात अपने दिल से निकाल को की उनके पिता इस बात की इजाजत नहीं देंगे जब उनको ये बात का पता चला तो उन्होंने उनके शादी करवाने की सोची कुछ दिन बाद उनकी शादी 1991 में मीना से करवादी जो सेना परिवार से थी उनके पिता और भाई भी सेना मे थे मगर क्या था कुछ टाइम बाद उन्होंने सेना से त्याग पत्र दे दिया और एक गाड़ी खरीदे उसको खुद ही चलते थे उस टाइम कुछ एक या दो ही गाड़ी थी वो लगातार मेहनत कर रहे थे उनके और उनके पिता के बिच के रिश्ते मे दरार पड चुकी थी फिर कुछ टाइम बाद उनके एक बेटी का जनम हुआ फिर क्या था किश्मत ने वो पलटी मरी की उन्होने एक के बाद एक व्यवसायीक वाहन खरीद ते चले गए उनके बेड़े में टाटा कंपनी की 407 की गाड़िया की संख्या ज्यादा थी वो अपने बिज़नेस को और बड़ा करना चाहते थे इसी टाइम उनकी माता जी है देहांत हो गया उनकी मोत ने उनके अंदर से तोड़ दिया कुछ टाइम बाद उन्होंने अपने बचपन के दोस्त वीरेंदर के साथ एक साझेदारी की वो स्कूल को बस सेवा देंगे इस में बड़ा जोखिम था मगर वो पीछे हटने को त्यार नहीं थे उन दोनों ने पंजाब नेशनल बैंक से क़र्ज़ ले कर 10 बस खरीदी . उन्होंने स्कूल वो विश्वाश दिलवाया की वो आप के बच्चो की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखे गे उनके बस की गति 50 किलोमीटर से ज्यादा नहीं होगी . उसे समय कोई बच्चो की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखता था फिर क्या था इस बात का फायदा दोनों साझेदारो ने उठाया . उन्होंने अपने वाहन चालक को ड्रेस दी ताकि वो अलग दिखाए दें उन्होंने एक के बाद एक स्कूल में अपनी बस सर्विस देनी शुरू कर दी मगर उन्होंने एक गलती कर दी की उन्होंने बड़े वाहन खरीदे क्यो की उस टाइम सरकार ने पहाड़ मे पत्थर तोड़ने की इजाजत दें राखी थी कुछ टाइम बाद सरकार बदल गई . ये पासा उल्टा पड गया क्योकि इस सरकार ने खनन पर रोक लगा दी उनके कुछ बड़ा करने के चक्र मे उल्टा हो गया था फिर ये साझेदारी आगे नहीं चल पाए . रामकिशन के हिसे मे बस का बेडा और वीरेंदर के हिसे मे व्यवसायीक वाहन आये मगर रामकिशन अपने हिसे मे व्यवसायीक वाहन चाते थे क्योकि उनकी उन्होंने अपने बिज़नेस की शुरवात उससे की थी कुछ टाइम बाद वीरेंदर ने ये बिज़नेस को बेच दिया . मगर रामकिशन ने ये बिज़नेस चालू रखा . उनका ये बिज़नेस घाटे मे चल रहा था पर उन्होंने हार नहीं मानी . इसी दौरान उनके पिता जी का देहांत हो गया उन्होंने अपने बिज़नेस का नाम "दीक्षित रोड लाइन" से बदल कर "दीक्षित ट्रांसपोर्ट" कर दिया फिर कुछ टाइम बाद उनका बिज़नेस फिर से फायदा मे आया .अब उनके बेड़े में कुल 20 बसे है. उनके 1 लड़की 2 लड़के है. उनकी बेटी चंडीगढ़ ( पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय ) में अभ्यास कर रही है और उनका छोटा बेटा M .B.B.S. कर रहा है अब हॉस्पिटल सेक्टर मे भी अपना निवेश कर रहे है उनकी नजर अब रियल एस्टेट पर है उन्होंने इस के लिये माउंट आबू मे जमींन भी खरीदी है उनका मानना है की अगर एक बिज़नेस मे हानि हो तो दूसरा बिज़नेस उसकी सहयता करे क्योकि भविष्य अनिश्चित है और हमको उसके लिए त्यार रहना चाहिए क्योकि भगवान भी उनकी मदद करते है जो खुद की मदद करते है और हर प्रस्थिति में अपनी सहयता करते है